मंगलवार, 27 मार्च 2018

सीता पूछे एक स्वाल

सीता पूछे एक स्वाल 


‘तुमने मुझसे साढ़े तीन हजार साल पहले विवाह किया था?’
‘‘हां, किया था’
‘और मैंने  14 वर्षोें तक  अपने सारे सुख त्याग कर  तुम्हारा जंगलों में साथ निभाया था। "
‘हां, निभाया था’
‘इसके बावाजूद फिर तुमने मुझ पर अविश्वास क्यों किया? मेरा त्याग क्यों किया?’"
‘‘पर लोगों की ज़बान तो नहीं पकड़ी जा सकती थी ना! "
‘‘ठीक है। अगर यह बात है तो आज मैं स्वयं ही तुम्हारा त्याग करती हूॅं।"
‘पर क्यों?’
वह सीता कई हजार साल पहले राम के पल्लू में दी गई  थी अब पढ़ लिख कर अपना भला बुरा स्वयं सोचने लगी है। आज उसे भी राम से एक स्वाल पूछने का साहस है।’
‘ क्या ? ठीक है,  चलो, पूछो!’
‘यही कि मैं तुम पर यह कैसे विश्वास कर लूं कि मेरी अनुपस्थिति में तुमने भी किसी.....’
‘अ..अ..अ............!!!’
  *******
 
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रविवार, 25 मार्च 2018

nanhi chidiya नन्ही चिड़िया

-बलदेव सिंह महरोक


एक था  चिड़िया का नन्हा बच्चा . उसके छोटे छोटे पंख  उग आये थे.
वह धीरे धीरे अपने  घोंसले के आसपास फुदकने लगा था  ।  वहां से यहाँ., यहाँ से वहां।  
कुछ दिन बाद उसके पंख कुछ  बड़े हो गये. अब वह  उड़ना चाहता था।  आसमान में.. मुक्त  हवा में।
परन्तु उसकी माँ  चिड़िया बार बार उसे खींच  लाती वापिस घोंसले  में।  'तू अभी इतना बड़ा नहीं हु आ ।    बैठ यहां। बाहर  बहेलिये   जाल  लगाए  बैठे हैं ' , नन्हा बच्चा  मन मसोस कर रह गया । 
घोंसले में बैठा बैठा  वह  आसमान में उड़ते हुए  पक्षिओं को देखता 
'पता नहीं मैं कब उड़ूँगा . ' वह सोचता ।  

       फिर एक दिन नन्हा बड़ा    गया।      अब वह अच्छी तरह उड़ सकता  था. हाँ. .  एक  दिन मां  चिड़िया ने  उसे उड़ते देखा तो बहुत   खुश  हुई. .
     बोली, जाओ मेरे बच्चे , यह विशाल आसमान तुम्हारा इन्तजार कर रहा है. उड़ते रहो जब तक  साँस 'है ।  
       और  बच्चे ने अपनी माँ की ओर देखा।  चिड़िया ने अपने बच्चे  की ओर देखा.  
  'बॉय मम्मी,'  बच्चा बोला  और माँ  देखती रही, उसे उड़ते हुए।  दूर तक; . जब तक कि वह  आँखों से  ओझल नहीं हो गया।  चिड़िया के चेहरे पर  मुस्कान थी. . 
और आंसुओं की एक बूँद माँ  चिड़िया की आँखों से निकल कर उसकी चोंच पर लुडक  गई. ; 
आज  उसे आज अपनी पूर्णता का एहसास हो रहा था.
 ;
  

शनिवार, 24 मार्च 2018

 वह सांवली लड़की 
वह सांवली लड़की
कन्धों पर एक फटी बोरी लटकाए
तीखे नैन नक्श वाली लड़की
भरी यौवना सी
निर्लिप्त नैन
 फटे कुर्ते से झांकते
अपने फटे अंचल से
रह रह कर छुपाती अपने यौवन को
वह सांवली लड़की
सड़कों के किनारे \
दुकानों के सामने/मकानों के पीछे
कूड़े के ढेर पर बीनती
कागज के टुकड़े
प्लास्टिक थैलियां
लोहे के टुकड़े
वे अलहड़ सी
इसी ---धरती की पुत्री
किसी  चित्रकार की  मूर्ति
 कभी झुकती, कभी  उठती
 आसपास से बेखबर
सहसा उसकी  की बगल में
कार से उतरी एक
चिट्टे दूध रंग की युवती
बाल कटे हुए
भवें तराशे हुई
ब्यूटी पार्लर से सजी
कृत्रिम मेकअप से
व्यर्थ में छुपाते हुए  गालों
पर उभर आये धब्बों को
ऊँची एड़ी के सैंडिल को  ठपठपाती,
कार के पास से गुजरते
कागज बीनते लड़की  को
हिकारत से  देखकर
नाक पर रुमाल रखा
शो रूम में दाखिल  होते ही
उसने साँवले सुन्दर चेहरे को देखा
और तुलना  की अपने चेहरे से
कहीं ज्यादा खूसूरत थी वह सांवली लड़की

और देखती रह गई।
अपने से कहीं ज्यादा  अमीर लगी उसे
 वह सांवली लड़की
जल गयी देखकर ईर्ष्या से
उसे अपना चेहरा और भी कुरूप लगने लगा
 और वह  सांवली लड़की
अपने आसपास  से अनभिज्ञ
 लपकी एक बड़ा सा प्लास्टिक का टुकड़ा देखकर
मिल गया हो मानो
उसे कोई खजाना
चमक उठी आँखें उसकी।
अब  उसका सांवला चेहरा
और भी दमकने लगा।














बुधवार, 21 मार्च 2018

baathaipar
सरहद पार से आने वाली कुछ खुशबूदार हवाओं के झौंके

     हमारी एक बनी बनाई धारणा है कि पाकिस्तान की ओर आने वाली हवायें हमेशा जहरीली और नफरत भरी होती हैं।
हम नहीं जानते कि इस प्रकार की हवायें पाकिस्तान के भीतर से चलती है या उनमें कहीं रास्ते में ज़हर घुल जाता है, मगर हम इतना
जरूर जानते हैं कि ये हवांये बहुधा अच्छी नहीं होतीं।
लेकिन पिछले दिनों सरहद के उस पार से हवाआंें के दो-तीन खुशबूदार झौंके आये। जिन लोगों को इनके बारे पता चला उन्होंने इसे जरूर महसूस किया है।
एक झौंका तब आया जब स्विटजर्लैंड के सैंट मौरिज में पाकिस्तान क्रिकेटर के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी अपने हिन्दुस्तानी फैंस के आग्रह पर उनके साथ फोटो खिंचवाने लगे। हुआ यूं कि एक हिंदुस्तानी लड़की के हाथ में तिरंगा झंडा पकड़ा हुआ था। वह उसे छुपाने का प्रयास करने लगी शायद यह सोच कर कि पाकिस्तानी क्रिकेटर को यह अच्छा न लगे।
मगर शाहिद अफरीदी ने उसकी इस बात को भांप लिया और उसने उस लड़की से तिरंगे को सामने फैलाने के लिये कहा। और तिरंगा सामने फैलाने के बाद बड़ी शान से उसने अपने हिंदुस्तानी चाहने वालों के साथ फोटो खिंचवाई। यही नहीं, अफरीदी ने कहा- ‘हमें एक दूसरे देशों के झण्डे का सम्मान करना चाहिये।
ऐसा करके शाहिद ने हिंदुस्तानियों का दिल जीत लिया। इस पूरी घटना की वीडियो मीडिया में वायरल हुआ । कुछ टीवी चैनलों ने भी इसे दिखाया। जिस ने भी मीडिया में देखा वह पाकिस्तान के इस खिलाड़ी की तारीफ किये बिना न रह सका।
वाह अफरीदी साहब ! आपने हमारे देश के झंडे का सम्मान किया । इसके उत्तर में हम आपके इस जज़्बे को सलाम करते हैं। आपने दोनों देशों के अवाम को एक बहुत बड़ा पैगाम दे दिया है।
दूसरी घटना राजस्थान के हिंदू परिवार की है जिन्होंने अपनी लड़की का रिश्ता पाकिस्तान में रह रहे एक हिन्दू परिवार के लड़के के साथ किया है। लड़के और उसके पिता को वीजा मिल गया परंतु मां का वीजा किसी कारण अटक गया था। हो सकता है बाद में हल हो गया हो।
हमारे एक-दो टीवी चैनलों ने इस खबर को संक्षिप्त रूप में दिखाया और यह भी बताया कि पाकिस्तान में रह रहे इस हिंदू लड़के का परिवार वहां बड़ी शानो-शौकत के साथ रह रहा है।
और तीसरा खुशबूदार हवा का झौंका तब आया जब पाकिस्तान में 38 वर्षीय कृष्णा कुमारी कोहली नाम की एक हिंदू लड़की को वहां की सीनेट का सदस्य चुना गया। वह पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की ओर से उमीदवार थी। वहां की सीनेट को लगभग वे सभी शक्तियां प्राप्त हैं जो हमारे यहां लोकसभा को है। कृष्णा कुमारी पाकिस्तान में एक हिंदु दलित परिवार से संबंध रखती है जिनका परिवार स्वंतंत्रता सैनानी रहा है। उनके परिवार के एक व्यक्ति को 1858 में ब्रिटिश सरकार ने फांसी पर भी लटका दिया था।
इस प्रकार से यदा-कदा आने वाले समाचार हमारी कई धारणाओं को झुठला देते हैं।
हमारा मीडिया इस प्रकार की खबरें बहुत कम देता है और अगर देता भी है तो बहुत संक्षिप्त रूप में। ...अपनी-अपनी मजबूरियां होती हैं।
खैर, ऐसी हवाये ंहमेशा आती रहें। यही हमारी तमन्ना है। हमारी इच्छा है कि सरहद के दोनों ओर के आवाम खुश रहें।
और हां, चलते-चलते......
पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म ‘अय्यारी’ के एक सीन में इंटैलीजेंस विभाग के दो अफसरों की बातचीत के दौरान एक पूछता है-सर, जब दो देशों में इतने इंटैलीजैंट आदमी मौजूद हैं तो वे कशमीर का मसला हल क्यों नही कर लेते।?
तो इस पर दूसरा अफसर जवाब देता है-‘कशमीर एक मसला नहीं, एक इंडस्ट्री है, दोनों देशों के सियासतदानों के लिए....’



💘

सोमवार, 16 जनवरी 2017

  • हमारे भारत में
किसी बाहरी आक्रमण की जरूरत नही
हम हिन्दू-मुस्लमान आपस में ही काफी है  
एक दूसरे को मरने और मारने के लिए।
हम खुद ही बम फोड़ सकते हैं 
आग लगा सकते हैं
मंदिर और मस्जिद ढा सकते हैं।
दंगे करा सकते हैं
एक दूसरे को क़त्ल कर सकते हैं
हे आंतंकवादियो!  
भारत में अपनी ऊर्जा यूं ही जाया मत करो, 
कोई और देश ढूंढ लो,
          

गुरुवार, 1 सितंबर 2016

Hamari Betian

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मंगलवार, 30 अगस्त 2016


 साम्प्रदायिक राजनीति  के चक्रव्यू में फंस एक पवित्र नारा
क्या इसे हम अपने देश का दुर्भाग्य कहें की आज हम एक ऐसी राजनितिक व्यवस्था  इन जिसमे नेता और राजनितिक दाल अपनी  महत्वकांशा के चलते भरा की राजनीतित  तरह से प्रदूषित करने में लगे हुए हैं. लोकतान्त्रिक  व्यवस्था की एक बड़ी त्रुटि यह है की सत्ताधारियों द्वार अपने   जनता के हितों की बलि चढ़ाने में कीसी भी तरह की परहेज नहीं ;किया जाता.
चिंता की जिस बात की और हमारा ध्यान बरबस जाता है वह यह है की भाजपा के नेताओं द्वार जिस  आरएसस  के एजेंडे के अनुसार कुछ   उठाया जा रहा है जिनका आज कक   अर्थ नहीं है.   लेकर उसे अपने तरिके से उरिभाषित करना उनकी  आदत हिन्ही है बल्कि राजनीती  का एक हिस्सा है.
 .
हमारे देश का एक पवित्र नैरा था  -'भारत माता की जय' 'था' इसलिए  क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक यह नर कत्यन्त पवित्र मन जाता था. जिस को आज तक प्रत्येक  भारतीय पवित्रता से ग्वल्ता चला आ रहा था  कभी किसी  को यह ख्याल नहीं आया था की   भी किन्हीं सीमाओं में बांध दिया जायेगा. परंतु हमारे हिन्दू राष्ट्रवादियों ने इन पवित्र   भगवा रंग चढ़ा कर इसे केवल हिंदुओं तक सीमित करने की कोशिश  की है

. जिस प्रकार  आरएसएस   प्रायोजित भाजपा के मनफट्ट नेताओं  द्वारा सुनयोजित तग़रीक़े से देश के लोगों  कोभरत  बोलने के लिए निर्देश  देने का अभियान चलाया है उससे  एक बार तो पूरा देश दो  खेमो में बांटता हुआ सा लगा.  आज तक सभिदेश्वासि चाहे वे हिन्दू हों या मुसलमान या अन्य किसी। जरफ्म के.  को बोलने में गर्ब्व  महसूस किया जाता था प्रन्तुअब उसे बोलने से पहले उनकी जबान  यदि अटकती हैं या उन्हें  पड़ता हैं तो इसका  दोष केवल आर एस एस को  जाता  हैं. .

कितने दुःख की बात हैं की भगवाधारियों  द्वारा  बड़े सुनयोजित  तरीके ड़ड़ड़ड़ से से की आग में  धकेलने की साजिश रची जा रही है. आज येलोग हिन्दुस्तगं, भारत और  कोभीअपने हिसाब से परिभाषित सहने में लगे हुए हैं. अगर अपने देशकोकोई भारत ये हिंदुस्तान या इंडिया  के नाम से पुकारता है तो इसमें हर्ज ही क्याहै।   को अगर पलट कर देखा  तो  वृहद  भौगोलिक  भूमि का समूह हैं जिसमें   साथ साथ पाकिस्तान बगला अब   दलशउर भूटान  जैसे  छोटे छोटे राज्य   हैं. परंतु भगवाधारियों के निर्देशों  का  करते हुए यदि हम 'भारत जय'  बोलते हैं  इसका अर्थ यह हुआ की हम में इसके साथ साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश की भी जय बोल जाते हैं जिनको कि हम  अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं.  भारत शब्द की ध्वनि से  किसी भी लिहाज से हिन्दू देश    अर्थ नहीं निकलता जबकि 'हिंदुस्तान' शब्द से 'हिन्दू'शब्द की धवनि निकलती हैं. . वास्तव में आजादी व  बटवारे  पश्चात हमारा देश भारत न रह कर  हिंदुस्तान रह गया है. और हिन्दू राष्ट्र   लाने वाले आरएसएस के लोग हिंदुस्तान शब्द को य ममं  शब्द  को स्वीकार कर  रहे हैं तो       इसे हिन्दू राष्ट्र  ऐसी भूमिके रूप; में  मान्यता  जिसमें हिँउद फग नहीं  बल्कि अनेक धर्मो लउर जातियन के लोग रह रहे हैं

अब भगवाधारियों को कौन समझाए कि  जो वे करना चाहते हैं उससे बिलकुल उल्ट हो रहा हैं.



 कितना अच्छा लगता है कितना अच्छा लगता है राजा को जब रियाया खड़ी होती है हाथ पसारे   उसके महल के द्वार पर कितना अच्छा लगता है राजा को जब रियाय...